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November 27, 2011

मैं फिर अकेला हूँ...




जिन्दगी सिसक रही थी    
ठहरा-ठहरा था सब,    
बेज़ार, बेरंग पतझड़ सा;    

तुम आई    
लगा जीना कुछ है    
एक उद्देश्य मिला था    
रोशनी देखी थी तुममें;    

    फिर हवा का झोंका आया
    ले गया नव-कुसुमित खुशियों को,
    रोशनी को, तुमको
    मुझसे छीन; कहीं दूर;

    एक बार फिर अँधेरा है
    फिर जिन्दगी वीरान है
    एक बार फिर अकेला हूँ मैं |

उक्त कविता Eric Segal के उपन्यास 'Love Story' से प्रभावित है|
आशा है आपको पसंद आई - अनाड़ी Ashish

4 ने कुछ कहा:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर प्रस्तुति

Ganesh Gopalasubramanian said...

Loneliness is a universal issue. I recommend you to see Taxi Driver. Beating loneliness is not easy. But getting to live with it can be tried. You know what, all great achievers fought loneliness with vision and passion.

Not at ur usual best I guess!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जीवन का यही खेल है..... गहरे भाव हैं....

S.N SHUKLA said...

ख़ूबसूरत प्रविष्टि , बधाई.

कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर भी पधारने का कष्ट करें , आभारी होऊंगा

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